माँ अंगार मोती माता मंदिर गंगरेल – इतिहास, महत्व और अद्भुत मान्यताएँ
माँ अंगार मोती माता मंदिर का परिचय
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के पास स्थित माँ अंगार मोती माता मंदिर एक अत्यंत पवित्र और प्राचीन धार्मिक स्थल है। यह मंदिर धमतरी शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर गंगरेल बांध के तट पर स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण से घिरा यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है। यहाँ हर वर्ष हजारों भक्त माता के दर्शन करने और अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करने के लिए आते हैं।
मंदिर का स्थान और प्राकृतिक वातावरण
माँ अंगार मोती माता का मंदिर रविशंकर जल परियोजना के अंतर्गत गंगरेल बांध के पास स्थित है। मंदिर के आसपास हरियाली, पहाड़ और नदी का सुंदर दृश्य देखने को मिलता है, जो इस स्थान को और भी पवित्र और आकर्षक बनाता है।मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने दो सिंहों की प्रतिमाएँ स्थापित हैं, जो शक्ति और संरक्षण का प्रतीक मानी जाती हैं।
वन की देवी के रूप में माँ अंगार मोती
माँ अंगार मोती को वन देवी के रूप में भी पूजा जाता है। मान्यता है कि माता का संबंध प्रकृति और जंगलों से है। यही कारण है कि उनकी प्रतिमा आज भी खुले आकाश के नीचे विशाल वृक्ष के नीचे बने चबूतरे पर स्थापित है।
ऋषि अंगीरा की पुत्री होने की मान्यता
धार्मिक कथाओं के अनुसार माँ अंगार मोती महान ऋषि अंगीरा की तेजस्वी पुत्री थीं। कहा जाता है कि ऋषि अंगीरा का आश्रम सिहावा क्षेत्र के पास घठुला नामक स्थान पर स्थित था।
42 गांवों की अधिष्ठात्री देवी
माँ अंगार मोती को आसपास के 42 गांवों की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इन गांवों के लोग माता को अपनी कुलदेवी मानते हैं और हर शुभ अवसर पर माता की पूजा-अर्चना करते हैं।
माता का प्राचीन मंदिर
माँ अंगार मोती का मूल मंदिर पहले चंवर, बटरेल, कोरमा और कोकड़ी गांवों की सीमा पर सुखा नदी के संगम स्थल पर स्थित था। यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता था।
देवी का इतिहास और गंगरेल बांध
सन 1937 में माता की मूल प्रतिमा चोरी हो गई थी, लेकिन चोर माता के पवित्र चरण नहीं ले जा सके। बाद में नई प्रतिमा को उन्हीं चरणों के पास स्थापित किया गया।
सन 1976 में गंगरेल बांध बनने के बाद आसपास के कई गांव पानी में डूब गए, जिनमें माता का मंदिर भी शामिल था। इसके बाद धार्मिक विधि-विधान के साथ माता की प्रतिमा को वर्तमान स्थान पर स्थापित किया गया।
नवरात्रि में विशेष पूजा और ज्योति कलश
चैत्र और क्वार नवरात्रि के समय यहाँ भक्तों द्वारा ज्योति कलश जलाए जाते हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
दीपावली पर विशाल मेला
हर वर्ष दीपावली के पहले शुक्रवार को यहाँ भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। मान्यता है कि इस अवसर पर 42 गांवों के देवी-देवता भी माता के दरबार में उपस्थित होते हैं।
संतान सुख की मान्यता
माँ अंगार मोती के बारे में यह भी माना जाता है कि जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित होते हैं, वे यदि सच्चे मन से माता के दर्शन करते हैं तो उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
मंदिर में अन्य देवताओं की प्रतिमाएँ
मंदिर परिसर में माता अंगार मोती के अलावा सिद्ध भैरव, भवानी, डोकरदेव और भंगाराव की प्रतिमाएँ भी स्थापित हैं, जिनकी श्रद्धालु पूजा करते हैं।
पूजा और परंपरा
मंदिर में प्रत्येक रविवार और शुक्रवार को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। मंदिर के पुजारी देव सिंह ध्रुव के अनुसार उनका परिवार पिछले 7 पीढ़ियों से माँ अंगार मोती की सेवा करता आ रहा है।
निष्कर्ष
माँ अंगार मोती माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि आस्था, विश्वास और संस्कृति का प्रतीक है। गंगरेल बांध के सुंदर वातावरण में स्थित यह मंदिर भक्तों को आध्यात्मिक शांति और शक्ति प्रदान करता है। जो भी श्रद्धालु यहाँ सच्चे मन से माता के दर्शन करता है, उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण होने की मान्यता है।
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